नई दिल्ली में आयोजित एक उच्चस्तरीय अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक मंच पर पश्चिमी देशों के दोहरे चरित्र को बेनकाब किया है। पीएम मोदी ने कहा कि विकासशील देशों पर कार्बन उत्सर्जन का पूरा ठीकरा फोड़ने और ऐतिहासिक रूप से प्रदूषण फैलाने वाले पश्चिमी देशों को उनकी जिम्मेदारी से बरी करने का नैरेटिव पूरी तरह से भ्रामक है।
आंकड़े पेश करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि 1751 से लेकर अब तक वैश्विक कार्बन उत्सर्जन में भारत की संचयी हिस्सेदारी मात्र 3.5 प्रतिशत है। वर्तमान में भी भारत का प्रति व्यक्ति (Per Capita) वार्षिक कार्बन उत्सर्जन केवल 2.2 टन है, जो कि वैश्विक औसत (4.7 टन) से आधा और अमेरिका व रूस (14.2 टन) की तुलना में लगभग छह गुना कम है। प्रधानमंत्री ने गर्व के साथ रेखांकित किया कि भारत जी-20 (G20) का इकलौता ऐसा देश है जिसने जलवायु परिवर्तन से जुड़े अपने पेरिस समझौते के लक्ष्यों को तय समय सीमा से काफी पहले ही पूरा कर दिखाया है।
