देश के करोड़ों बैंक ग्राहकों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए राहत की बड़ी खबर आई है। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स (UFBU) द्वारा 28 सितंबर से आहूत तीन दिवसीय राष्ट्रव्यापी बैंक हड़ताल को अंतिम समय में स्थगित कर दिया गया है। इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) और बैंक यूनियनों के प्रतिनिधियों के बीच देर रात तक चली सकारात्मक वार्ता के बाद यह फैसला लिया गया। हड़ताल के टलने से देश भर में सरकारी और निजी बैंकों का कामकाज सामान्य रूप से चालू रहेगा और चेक क्लियरिंग, कैश डिपॉजिट तथा डिजिटल ट्रांसैक्शन सेवाएं बाधित होने से बच गई हैं।
यह हड़ताल मुख्य रूप से बैंकों में 5-डे वर्क वीक (सप्ताह में 5 कार्य दिवस) लागू करने, पेंशन पुनरीक्षण (Pension Revision), नई पेंशन योजना (NPS) को समाप्त कर पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली और बैंकों में खाली पड़े पदों पर त्वरित भर्ती जैसी मांगों को लेकर बुलाई गई थी। बैंक कर्मचारी यूनियनों का तर्क था कि कार्यभार अत्यधिक बढ़ जाने के कारण कर्मचारियों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है, इसलिए अन्य वित्तीय संस्थानों की तर्ज पर बैंकों में भी शनिवार और रविवार की छुट्टी अनिवार्य की जानी चाहिए।
आईबीए (IBA) और केंद्रीय वित्त मंत्रालय के उच्च अधिकारियों के साथ हुई मैराथन बैठक के दौरान प्रबंधन ने यूनियनों की प्रमुख मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने और एक निश्चित समयसीमा के भीतर समाधान निकालने का आश्वासन दिया है। IBA के सूत्रों के अनुसार, 5-दिवसीय बैंकिंग के प्रस्ताव को सरकार के समक्ष अंतिम मंजूरी के लिए पहले ही भेजा जा चुका है, और इस पर प्रशासनिक औपचारिकताएं अंतिम चरण में हैं। यूनियनों ने सरकार के इस सकारात्मक रुख का स्वागत करते हुए अपनी प्रस्तावित हड़ताल को फिलहाल के लिए टालने का निर्णय लिया।
बैंक हड़ताल स्थगित होने से आगामी त्योहारी सीजन (दशहरा और दीपावली) से पहले देश की अर्थव्यवस्था को लगने वाले संभावित झटके को टाल दिया गया है। यदि यह हड़ताल होती, तो लगातार तीन दिनों तक बैंकों के बंद रहने से देश भर में अरबों रुपये के वित्तीय लेनदेन ठप हो सकते थे और एटीएम (ATM) में नकदी का संकट पैदा हो सकता था। केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने भी इस समझौते पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा है कि बैंक कर्मचारियों के हितों की रक्षा के साथ-साथ आम जनता की सुविधाओं का ध्यान रखना सरकार की प्राथमिकता है।
