गोपेश्वर (चमोली): मां नंदा देवी की 12 वर्षीय बड़ी जात जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, नंदा पथ पर आस्था और भक्ति का अद्भुत नजारा देखने को मिल रहा है। 12 साल बाद देवी नंदा अपने मायके से ससुराल कैलास के लिए विदा ले रही हैं। पहाड़ में बेटी का प्रतिरूप मानी जाने वाली मां नंदा के दर्शन के लिए श्रद्धालु पलक-पावड़े बिछाकर उनका स्वागत कर रहे हैं।
- 296 किमी की यात्रा और 26 पड़ाव: यह 296 किलोमीटर लंबी पैदल धार्मिक यात्रा 26 पड़ावों से होकर गुजर रही है, जिसमें उच्च हिमालय के 5 निर्जन पड़ाव भी शामिल हैं।
- दो चौसिंग्या खाडू कर रहे अगुआइ: इस बार दो चार सींग वाले मेढ़े (चौसिंग्या खाडू) बड़ी जात का नेतृत्व कर रहे हैं। 20 सितंबर को होमकुंड में पूजा-अर्चना के बाद इन्हें कैलास के लिए विदा किया जाएगा।
- पहली बार शामिल हुई बंद भूम्याल की डोली: पहली बार मां नंदा देवी की बड़ी जात में बंद की छंतोली व डोली शामिल हुई है। 13 सितंबर को यह डोली रमोणी में बड़ी जात का हिस्सा बनेगी।
