देहरादून (उत्तराखंड)। उत्तराखंड में मदरसा शिक्षा बोर्ड को समाप्त किए जाने और नवगठित ‘उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण’ के अस्तित्व में आने के बाद प्रदेश भर में बिना पंजीकरण और अवैध रूप से संचालित मदरसों के खिलाफ शिकंजा कस गया है। प्राधिकरण ने नए नियमों और तय मानकों के तहत पंजीकरण न कराने वाले मदरसों का पूरा रिकॉर्ड तलब कर लिया है। साफ कर दिया गया है कि बिना मान्यता और पंजीकरण के संचालित होने वाले किसी भी संस्थान को बख्शा नहीं जाएगा।
10 अवैध मदरसे सील, तीन को थमाया गया नोटिस
प्राधिकरण के निर्देश पर शिक्षा विभाग, जिला समाज कल्याण विभाग और स्थानीय प्रशासन की संयुक्त टीमों ने प्रदेशभर में ताबड़तोड़ छापेमारी शुरू कर दी है। अब तक 10 अवैध रूप से संचालित मदरसों को सील कर दिया गया है। इसके अलावा 3 अन्य संस्थानों को नोटिस थमाते हुए तय समय सीमा के भीतर सभी वैध दस्तावेजों के साथ जिला प्रशासन के समक्ष पेश होने के आदेश दिए गए हैं।
कार्रवाई के खौफ से 51 पर खुद लटके ताले, 161 पर गिर सकती है गाज
प्राधिकरण की शुरुआती जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं:
- 51 मदरसे प्रबंधन ने खुद किए बंद: प्रशासनिक कार्रवाई और जांच के डर से 51 मदरसों के प्रबंधन ने खुद ही संस्थानों पर ताले जड़ दिए हैं। हालांकि, प्राधिकरण इन सभी संस्थानों में पढ़ने वाले बच्चों का पूरा ब्योरा तलब कर रहा है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कोई भी बच्चा शिक्षा की मुख्यधारा से बाहर न रहे और उन्हें मान्यता प्राप्त स्कूलों में दाखिला दिलाया जा सके।
- 161 संस्थान अभी भी रडार पर: जांच में सामने आया है कि करीब 161 मदरसे अब भी किसी न किसी रूप में अनधिकृत तरीके से संचालित किए जा रहे हैं। इन सभी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की पूरी रूपरेखा तैयार कर ली गई है।
200 मदरसों ने किया आवेदन, 22 कड़े मानकों पर होगी जांच
उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड में पूर्व में मदरसा बोर्ड के तहत कुल 452 मदरसे पंजीकृत थे (जिनमें 52 वरिष्ठ माध्यमिक और 400 जूनियर हाईस्कूल स्तर के थे)।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद प्रदेश के करीब 200 मदरसों ने वैध संचालन के लिए ‘इन्वेस्ट पोर्टल’ (Invest Portal) पर अपना पंजीकरण कराया है। शिक्षा विभाग अब इन सभी संस्थानों के दस्तावेजों की गहन पड़ताल कर रहा है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि सरकार द्वारा निर्धारित सभी 22 नियमों और अनिवार्य मानकों को पूरा करने वाले संस्थानों को ही अल्पसंख्यक शिक्षा संस्थान के रूप में मान्यता दी जाएगी।
35 संस्थानों को मिली मान्यता, मुख्यमंत्री ने सौंपे प्रमाण पत्र
नियमों का पालन करने वाले संस्थानों को सरकार प्रोत्साहित भी कर रही है। प्रदेश सरकार अब तक 35 शिक्षण संस्थानों को अल्पसंख्यक शिक्षा संस्थान के रूप में विधिवत मान्यता प्रदान कर चुकी है। 1 जुलाई को 9 संस्थानों और हाल ही में 26 अन्य संस्थानों को मान्यता प्रमाण पत्र जारी किए गए। खुद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इन संस्थानों के प्रतिनिधियों को मान्यता प्रमाण पत्र सौंपे।
‘जबरन बंद कराना मकसद नहीं, बच्चों का भविष्य प्राथमिकता’
इस पूरी कार्रवाई पर उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के चेयरमैन डॉ. सुरजीत सिंह गांधी ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा:
“सरकार का उद्देश्य किसी भी अल्पसंख्यक संस्थान को जबरन बंद कराना नहीं है। मदरसा बोर्ड भंग होने के बाद सभी संस्थानों को नई पारदर्शी व्यवस्था और तय मानकों के दायरे में आना होगा। जो संस्थान तय प्रक्रिया और मानकों को पूरा नहीं करेंगे, उन पर सख्त कानूनी कार्रवाई होगी। इसके साथ ही वहां पढ़ रहे मासूम बच्चों को अन्य मान्यता प्राप्त स्कूलों में शिफ्ट कराया जाएगा, ताकि उनकी शिक्षा बाधित न हो।”
वीकली आई न्यूज़ का विश्लेषण: उत्तराखंड में मदरसा शिक्षा के ढांचे में यह बदलाव ऐतिहासिक माना जा रहा है। सरकार का यह कदम जहां अवैध और बिना मानकों के चल रहे संस्थानों पर रोक लगाएगा, वहीं मदरसों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से जोड़ने में मील का पत्थर साबित हो सकता है।
