नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में एक पाँच मंजिला इमारत ढहने से हुई सात लोगों की दुखद मृत्यु के मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय ने कड़ा संज्ञान लिया है। अदालत ने इस घटना को “अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण” करार देते हुए दिल्ली नगर निगम (MCD) को निर्देश दिया है कि वह अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी पेइंग गेस्ट (PG) आवासों और छात्र छात्रावासों का एक सप्ताह के भीतर सुरक्षा निरीक्षण करे।
सत्य निकेतन क्षेत्र दिल्ली विश्वविद्यालय के दक्षिणी परिसर के निकट होने के कारण हजारों छात्रों का मुख्य रिहायशी केंद्र बना हुआ है। यहाँ अनियंत्रित शहरीकरण और बिना प्रशासनिक अनुमति के पुरानी संरचनाओं में अतिरिक्त निर्माण की शिकायतें लंबे समय से सामने आ रही थीं। मामले की सुनवाई करते हुए न्यायालय ने टिप्पणी की कि छात्रों और युवाओं की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता। अदालत ने अवैध निर्माणों, अग्निशमन अनुपालन की कमी और जर्जर इमारतों पर तत्काल कार्रवाई रिपोर्ट (Status Report) दाखिल करने का आदेश MCD आयुक्त को दिया है।
इस बीच, दिल्ली पुलिस ने इमारत के मालिक को गिरफ्तार कर लिया है और लापरवाही से मौत का कारण बनने सहित अन्य धाराओं के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है। प्रारंभिक जाँच में पता चला है कि इमारत के भूतल में मरम्मत कार्य कराया जा रहा था, जिससे कमजोर पड़ चुकी संरचना ढह गई। MCD ने अपने स्थानीय अधिकारियों के खिलाफ भी विभागीय जाँच के आदेश दिए हैं कि बिना अनुमति के यह निर्माण कार्य कैसे जारी था। इस हादसे ने एक बार फिर बड़े शहरों में अनियंत्रित और अवैध निर्माण तथा प्रशासनिक उदासीनता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
