- शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की काशी से लखनऊ की यात्रा 7 मार्च से
- 11 को लखनऊ में होगी जुटान गोहत्या-गोमांस निर्यात रोकने को दबाव बनाने का प्रयास
- ऐसा करने की सीएम को दे चुके हैं चुनौती, अन्यथा योगी को कालनेमि घोषित करने की है तैयारी
प्रवीण द्विवेदी, वीकली आई न्यूज़
लखनऊ। माघ मेला क्षेत्र प्रयागराज से उठे विवाद का तूफान शांत होने का नाम ही नहीं ले रहा है। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर लगे बाल यौन शोषण के आरोप भी उनका मनोबल तोड़ नहीं पाए हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट से मिली गिरफ्तारी से राहत के बाद शंकराचार्य फिर से योगी विरोधी मुहिम में जुट गए हैं। कहने को तो इस यात्रा का मुद्दा गोहत्या और गोमांस निर्यात रोकने का दबाव बनाने के लिए है पर असल निशाने पर योगी हैं। शंकराचार्य पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि यदि चालीस दिन के भीतर यानी 10 मार्च तक योगी ये काम नहीं कर पाए तो वे उन्हें कालनेमि घोषित कर देंगे। अब उसी क्रम में 7 मार्च से उनकी काशी से लखनऊ तक की यात्रा होने जा रही है, जो 11 मार्च को लखनऊ पहुंचेगी। यानी सियासी ड्रामा एक बार फिर होगा।
प्रयागराज माघ मेला में स्नान विवाद को लेकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और सीएम योगी के बीच शुरू तल्खी बढ़ती जा रही है। उस वक्त अपने कथित अपमान से नाराज शंकराचार्य ने जब मेला प्रशासन और प्रदेश सरकार से माफी की मांग कर दी तो प्रशासन ने उल्टे उनसे शंकराचार्य होने का प्रमाण मांग लिया। उसके बाद अविमुक्तेश्वरानंद नाराज हो गए और धरने पर बैठ गए। इसके बाद हरियाणा के एक कार्यक्रम में सीएम योगी ने भी बिना नाम लिए ये कह दिया कि कुछ लोग कालनेमि बने घूम रहे हैं, और सनातन को बदनाम कर रहे हैं। इस बयान को शंकराचार्य ने अपने ऊपर ले लिया। उन्होंने कहा कि अगर योगी जी सच्चे सनातनी हैं तो वे यूपी से गोहत्या और गोमांस निर्यात रोक कर दिखाएं, नहीं तो 40 दिन बाद लखनऊ में संतों की सभा में उन्हें कालनेमि घोषित कर दिया जाएगा। और वह मियाद आगामी 10 मार्च को समाप्त हो रही है। और उसी के लिए शंकराचार्य की लखनऊ यात्रा हो रही है।
इसी दौरान योगी को मिली चुनौती के बाद जगद्गुरू रामभद्राचार्य के कथित शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी ने शंकराचार्य पर बाल यौन शोषण का मुकदमा दर्ज करा दिया है। मामले में शंकराचार्य ने हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत की याचिका लगाई तो हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई तक उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद शंकराचार्य ने फिर योगी के खिलाफ झोला उठा लिया है।
इस मामले में काशी से मिली जानकारी के अनुसार शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने वाराणसी से लखनऊ यात्रा का कार्यक्रम घोषित कर दिया है। उनकी यात्रा सात मार्च को वाराणसी से शुरू होगी और 11 मार्च को लखनऊ में समाप्त होगी। इस यात्रा के दौरान जौनपुर, सुल्तानपुर, रायबरेली, उन्नाव और नैमिषारण्य में भी सभाएं आयोजित की जाएंगी। तय कार्यक्रम के अनुसार 11 मार्च को लखनऊ के कांशीराम स्मृति स्थल पर इसका समापन होगा।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की प्रमुख मांगों में गाय को “राज्यमाता” घोषित करना और यूपी से बीफ निर्यात पर पूरी तरह प्रतिबंध लागू करना शामिल है। आरोप है कि पूरे देश का 40 फीसदी बीफ निर्यात यूपी से ही होता है। अपनी इस यात्रा के माध्यम से वे इन मुद्दों पर जन समर्थन जुटाएंगे। इस यात्रा में बड़ी संख्या में संतों के शामिल होने की संभावना है।
