देहरादून / नई दिल्ली: उत्तराखंड सरकार ने कांग्रेस द्वारा लगाए गए उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है जिसमें आरोप लगाया गया था कि एक प्रमुख थर्मल पावर प्रोजेक्ट की टेंडर प्रक्रिया में बदलाव कर फायदा पहुंचाया गया है। राज्य सरकार ने आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट किया कि टेंडर प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी और स्थापित प्रतिस्पर्धी नियमों के तहत आयोजित की गई थी।
विवाद की पृष्ठभूमि और कांग्रेस के आरोप
गुरुवार को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के मीडिया प्रमुख पवन खेड़ा ने नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए थे। कांग्रेस का दावा था कि राज्य की सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी (UJVN) और केंद्रीय उपक्रम THDC के संयुक्त उपक्रम वाले प्रस्तावित प्रोजेक्ट को रद्द कर दिया गया। विपक्ष का आरोप था कि नए टेंडर में 86 में से 84 शर्तों में ढील दी गई ताकि निजी क्षेत्र की संस्था को 25 वर्षों के लिए बिजली आपूर्ति का अनुबंध मिल सके।
राज्य सरकार का आधिकारिक पक्ष
18 सितंबर 2026 को उत्तराखंड सरकार के प्रवक्ता एवं संबंधित विभागों द्वारा जारी स्पष्टीकरण में कहा गया कि राज्य में बढ़ती बिजली मांग को पूरा करने के लिए निष्पक्ष बोली प्रक्रिया अपनाई गई थी। सरकार ने साफ किया कि:
- किसी भी सार्वजनिक नीति या वित्तीय मानक का उल्लंघन नहीं किया गया है।
- बिजली की खरीद दरें और पारेषण शुल्क (Transmission Cost) नियामक आयोग (Regulatory Commission) द्वारा तय दिशानिर्देशों के दायरे में हैं।
- सभी नियम प्रतिस्पर्धी दरों पर उपभोक्ता हित सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बनाए गए थे।
राज्य प्रशासन ने दोहराया कि विकास और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं पर अनावश्यक राजनीतिक विवाद खड़ा करने की कोशिश की जा रही है।
