- यूजीसी और घूसखोर पंडत ने भी टाल दिया चुनाव
- पिछड़ों के आरक्षण पर फैसले के बाद हो पाएंगे ये चुनाव
- सरकार ने जून तक लिया हाईकोर्ट से समय, शपथपत्र दिया
प्रवीण द्विवेदी,वीकली आई न्यूज़
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव अब जून 2026 के बाद ही संभव हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेशानुसार इसके पहले एक समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन होगा, फिर उसकी संस्तुतियों के आधार पर पिछड़े वर्ग का आरक्षण तय किया जाएगा। उसके बाद ही त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव हो पाएंगे। खबर है कि यह आयोग बनने, और कोटे का निर्धारण होने में कम से कम दो महीने तो लग ही जाएंगे। इसलिए ये चुनाव अपने निर्धारित समय अप्रैल 2026 से दो महीने देर यानी जून या उसके बाद ही हो पाएंगे। इसके अलावा यूजीसी रेगुलेशन और घूसखोर पंडत विवाद ने भी योगी सरकार को कुछ समय लेने के लिए मजबूर किया है।
जानकारी मिली है कि योगी आदित्यनाथ की सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में एक हलफनामा दिया है। इस मामले में एक जनहित याचिका दाखिल कर हाईकोर्ट में मौजूदा पिछड़ा वर्ग आयोग के अधिकारों को चुनौती दी गई थी। यह याचिका एडवोकेट मोती लाल यादव ने दाखिल की थी। पीठ के समक्ष पेश हुए सरकार के वकील ने बताया कि अब समर्पित पिछड़ा आयोग की रिपोर्ट के आधार पर ही पंचायतों में सीटों का आरक्षण तय होगा। ऐसे में आयोग को आरक्षण तय करने की प्रक्रिया में दो महीने का समय लग सकता है, इस कारण पंचायत चुनावों का टलना भी तय है।
याचिका में एडवोकेट मोती लाल यादव ने कहा था कि एक छह सदस्यीय समर्पित ओबीसी आयोग गठन का प्रस्ताव पिछले पांच महीने से अधिक समय से राज्य मंत्रिमंडल, के समक्ष लंबित है। और बिना इसके पिछड़ों का आरक्षण सही तरीके से लागू नहीं हो सकता है। इसी याचिका पर योगी सरकार ने जब हाईकोर्ट के आदेश का पालन करने का हलफनामा दिया है।
इसके बाद राजनीतिक हलकों में अब चर्चा है कि प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव इस साल के अंत तक कराए जा सकते हैं, ताकि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले चुनावी माहौल भी तैयार हो सके। इसके अलावा बीते दिनों हुए यूजीसी रेगुलेशन और घूसखोर पंडत फिल्म के नाम विवाद ने भी योगी सरकार को बैकफुट पर जाने को मजबूर किया है। इन दोनों ही विवादों ने भाजपा को राजनीतिक रूप से असहज कर दिया है। हालांकि दोनों ही मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप कर मामला संभालने की कोशिश की है परंतु दोनों भाजपा सरकारों की नीयत पर सवाल तो खड़े ही हो गये हैं। ऐसे में चुनाव जितना टलेगा उतना ही भाजपा को इस झटके से उबरने में मदद मिलेगी। इस प्रकार हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब यह तय है कि यह चुनाव जून 2026 तक तो नहीं होने जा रहे हैं।
जानकारी के अनुसार त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव इस साल अप्रैल में होने थे। लेकिन एसआईआर प्रक्रिया और इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के चलते अब इसमें देरी संभव है। सूबे में ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत, और जिला पंचायत चुनाव हर पांच वर्ष में आयोजित किए जाते हैं। पिछला पंचायत चुनाव अप्रैल 2021 में संपन्न हुआ था, इसलिए अगला चुनाव अप्रैल 2026 में होने की संभावना थी। वैसे अप्रैल में ही बोर्ड परीक्षा के कारण भी इसमें देरी हो सकती है। क्योंकि चुनाव के लिए भारी तादाद में शिक्षकों की भी जरूरत होती है। इस लिहाज से भी पंचायत चुनाव अपने निर्धारित समय अप्रैल 2026 में संभव नहीं हैं।
