- महाराष्ट्र निकाय चुनाव में कई दलों को आइना दिखा दिया
- समाजवादी पार्टी से चुनावी गठबंधन की चर्चा हुई तेज
- असम में बदरुद्दीन अजमल भी चाहते हैं उनका साथ
- प. बंगाल के हुमायूं कबीर भी मिलकर लड़ेंगे चुनाव
प्रवीण द्विवेदी, वीकली आई न्यूज़
लखनऊ। भारत की मुस्लिम राजनीति में एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी अचानक महत्वपूर्ण हो गये हैं। बिहार विधानसभा चुनाव में जो ओवैसी इंडी गठबंधन में शामिल होने के लिए कभी लालू, तेजस्वी और राहुल गांधी के पीछे दौड़ लगा रहे थे, और फिर भी एंट्री नहीं मिल पाई, वही ओवैसी इतने महत्वपूर्ण हो गये हैं कि उनकी डिमांड बढ़ गई है। लेफ्ट के नेता विवेक श्रीवास्तव को अब लगता है कि पूरे इंडी गठबंधन को एक होकर और उसमें ओवैसी को भी शामिल कर मुस्लिम मतों का विभाजन रोकना चाहिए, और भाजपा को मिलकर हराना चहिए। उनका कहना है कि ये समय निजी स्वार्थ से ऊपर उठकर लोकतंत्र बचाने का है। और अब तो सपा के सांसद रमाशंकर राजभर का भी कहना है कि भाजपा को हराने के लिए जो भी हमारे साथ आएगा, उनका स्वागत है। इस पर एआईएमआईएम के प्रवक्ताओं का कहना है कि ये लोग पहले दावत देते हैं, और फिर जाओ तो घर का दरवाजा बंद कर लेते हैं। इन पर विश्वास नहीं किया जा सकता है।बहरहाल जबसे ओवैसी की पार्टी ने महाराष्ट्र के निकाय चुनाव में सपा, एनसीपी और कांग्रेस से बेहतर प्रदर्शन कर अकेले 125 पार्षद जिता लिए हैं, तबसे देश में विशेषकर चुनावी राज्यों में, मुस्लिम मतों के दावेदारों की बेचैनी बढ़ गई है।ओवैसी को लेकर चर्चाएं समाजवादी पार्टी की बीते 20 जनवरी को हुई बैठक के बाद तेज हो गई हैं। सपा नेता और सांसद रमाशंकर राजभर ने उस बैठक से निकलने के बाद पत्रकारों से कहा कि भाजपा को हराने के लिए अगर ओवैसी साथ आते हैं, तो उनका स्वागत है। सूत्रों के अनुसार इस बैठक में 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए रणनीति पर भी चर्चा हुई, और अन्य दलों से गठबंधन पर भी बात हुई। बताते हैं कि चर्चा में एआईएमआईएम का भी जिक्र आया। सूत्र बताते हैं कि काफी नेता इस बात पर सहमत थे कि मुस्लिमों मतों का विभाजन रोकने के लिए ओवैसी को साथ लेकर चलने में बुद्धिमानी है। इनका मानना था कि हमें बिहार वाले अति विश्वास से बचना होगा। बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि हमने बिहार में ओवैसी की पार्टी के खिलाफ प्रचार करके देख लिया है, उसका कोई फायदा नहीं हुआ। ऐसे में वही गलती यहां करना आत्मघाती होगा। नेताओं ने कहा कि ओवैसी ने महाराष्ट्र के हालिया प्रदर्शन से साबित भी किया है कि अब वे मुसलमानों के बड़े नेता के रूप में उभर कर आ रहे हैं। सांसद राजभर ने भी शायद यही इशारा करते हुए कहा कि पार्टी के अंदर चर्चा चल रही है, और संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है।हालांकि इस बैठक के बाद अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि 37 से मिलेगी 27 की जीत। उनका यहां पर आशय 37 सांसदों के 185 विधानसभा क्षेत्रों से है। पर उनकी इस पोस्ट में इस बाबत कोई इशारा नहीं किया गया था। इसका सीधा मतलब यही है कि इस बारे में अभी कुछ निर्णय नहीं लिया गया है। और अभी माहौल का जायजा लिया जा रहा है, नफा-नुकसान का आंकलन किया जा रहा है। सपा के वरिष्ठ नेता शिवपाल यादव तो कहते हैं कि हमें ओवैसी की कोई जरूरत नहीं है, सपा अपने दम पर चुनाव जीतती है। खैर, सपा के सांसद रमाशंकर राजभर ने पार्टी की मीटिंग से निकलने के बाद यह भी कहा कि पूरा विपक्ष मिलकर भाजपा के खिलाफ हमारा साथ दे। उनके अनुसार रणनीति बन रही है, बातचीत चल रही है, देखिए क्या होता है। उधर एआईएमआईएम प्रवक्ता आसिम वकार इस पर कहते हैं कि पहले तो वे लोग बुलाते हैं, और बाद में दरवाजे बंद कर देते हैं। ऐसे लोगों का क्या भरोसा करना। उन्होंने कहा कि अगर अखिलेश यादव खुद न्यौता भेजेंगे तो हम इस पर विचार करेंगे। पार्टी के दूसरे प्रवक्ता शादाब चौहान का आरोप है कि हमारे नेता बैरिस्टर असदुद्दीन ओवेसी को बदनाम करने के लिए सपा के 41 सांसदों को मीटिंग में ट्रेनिंग दी गई है कि ओवैसी साहब को कैसे बदनाम करना है, और हम उनकी ये चाल समझते हैं।एआईएमआईएम के ही एक और प्रवक्ता वारिस पठान का कहना है कि दरअसल सपा की साइकिल के दोनों पहिए टूट चुके हैं, इसलिए वे परेशान हैं। वे कभी हां करते हैं, कभी ना करते हैं। उनकी बातों का कोई विश्वास नहीं है। वारिस पठान की ही बात को तंज के रूप में आगे बढ़ाते हुए भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया कहते हैं कि दरअसल सपा की साइकिल के दोनों पहिए पंचर हो गये हैं। अब वे दूसरे के सहारे यूपी की चुनावी नैया पार कराना चाहते हैं।वैसे जहां तक ओवैसी की बढ़ती ताकत का सवाल है तो महाराष्ट्र के निकाय चुनाव में मिली जीत के बाद असदुद्दीन ओवैसी एक मजबूत और स्वीकार्य मुस्लिम नेता के रूप में उभर कर सामने आए हैं। उनकी पार्टी ने समाजवादी पार्टी, कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना उद्धव के मुस्लिम वोट बैंक में बड़ी सेंधमारी की है। शायद इसी कारण असम में एआईयूडीएफ के चीफ बदरुद्दीन अजमल ओवैसी से गठबंधन के लिए तैयार हैं।पश्चिम बंगाल में हुमायूं कबीर तो पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि उनकी पार्टी ओवैसी की पार्टी से गठबंधन कर चुनाव लड़ेगी। लोग तो हुमायूं कबीर को पश्चिम बंगाल का ओवैसी कह कर संबोधित करते हैं। शायद यही माहौल देखकर सपा में भी ओवैसी से गठबंधन की चर्चा होने लगी है।
